Friday, March 4, 2016

Irony Of Life....

Dear Readers,
I came across these lines while I was surfing on internet...
Writer is anonymous but what he has written is fabulous...

Hope you like it...

Cheers for life :) :) 
मित्रों....
👌शाम को थक कर टूटे झोपड़े में सो जाता है वो मज़दूर........जो शहर में ऊंची इमारतें बनाता है....
👌मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान ज़िन्दगी भर का.....
👌मशवरा तो खूब देते हो "खुश रहा करो".....कभी-कभी वजह भी दे दिया करो...
👌अमीर की बेटी पार्लर में जितना दे आती है, .......उतने में गरीब की बेटी अपने ससुराल चली जाती है....
👌कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, ग़रीब वो था कि मैं....
👌दीदार की तलब हो तो नज़रें जमाये रखना ......क्यों कि 'नकाब' हो या 'नसीब' सरकता ज़रूर है''...
👌गठरी बाँध बैठा है अनाड़ी साथ जो ले जाना था वो कमाया ही नहीं
👌मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ, वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए....
👌जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
👌बचपन भी कमाल का था खेलते-खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी...
👌हर नई चीज़ अच्छी होती है........ लेकिन दोस्त पुराने ही अच्छे होते हैं....
👌ए मुसीबत जरा सोच के आना मेरे करीब कही मेरी माँ की दुवा तेरे लिए मुसीबत ना बन जाये....
👌खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं...
👌अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है की,..........माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये....
👌ज़िन्दगी तेरी भी, अजब परिभाषा है..सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है...
👌खुशियाँ तक़दीर में होनी चाहिये, तस्वीर में तो हर कोई मुस्कुराता है...
👌अहसास इश्क ए हक़ीक़ी का सब से जुदा देखा, इन्सान ढ़ूँढें मँदिर-मस्जिद...... मैंने हर रूह में ख़ुदा देखा..
👌ज़िंदगी भी विडियो-गेम सी हो गयी है......साला एक लैवल क्रॉस करो...... तो अगला लैवल और मुश्किल आ जाता है....
👌इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है.......
👌हम तो पागल हैं शौक़-ए-शायरी के नाम पर ही दिल की बात कह जाते हैं और कई इन्सान गीता पर हाथ रख कर भी सच नहीं कह पाते हैं…
👌हमेशा छोटी-छोटी ग़ल्तियों से बचने की कोशिश किया करो , क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं.......पत्थरों से ठोकर खाता है ..

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